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Coronavirus lockdown आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक व दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री गोपाल राय से खास बातचीत

वाशिंगटन: वर्ष 2020 की शुरुआत विश्व में बड़ी हलचलों के साथ हुई है. फिर चाहे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव हो या फिर भारत में लगातार हो रहे सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन. 2020 में विश्व के सामने कौन-सी बड़ी चुनौती होंगी इनको लेकर अमेरिका के एक समूह ने रिपोर्ट जारी की है. इनमें पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी भू-राजनीतिक जोखिम की सूची में शामिल हुआ है. 

इस सूची में देश में सांप्रदायिक एजेंडे, गिरती अर्थव्यवस्था को आधार बनाया गया है. अमेरिकी एजेंसी (Eurasia Group) प्रतिवर्ष इस तरह की सूची जारी करती है. यह अमेरिका की सबसे प्रभावशाली रिस्क असेसमेंट कंपनियों में से एक है. भारत को लेकर इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि, ‘नरेंद्र मोदी ने अभी तक अपना दूसरा कार्यकाल सामाजिक मसलों में गुजारा है, जबकि देश आर्थिक एजेंडा कहीं पीछे छूट गया है. वर्ष 2020 में इसका असर देखने को मिलेगा, ना केवल विदेश नीति बल्कि आर्थिक नीति पर भी ये असर छोड़ेगा.’

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, ‘मोदी सरकार ने बीते दिनों में जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को ख़त्म किया, नॉर्थ ईस्ट में घुसपैठियों को लेकर सख्ती दर्शाई, धर्म के आधार पर शरणार्थियों को नागरिकता दी. और इन सभी फैसलों के पीछे सबसे बड़ा हाथ देश के गृह मंत्री अमित शाह का है.’

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वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव की वजह से युद्ध जैसी स्थिति बन गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान को खुले तौर पर धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि, 'हम अमेरिका के लोगों की जिंदगी को बचाने के लिए कभी संकोच नहीं करेंगे और ना ही कोई बहाना बनाएंगे. चरमपंथी इस्लामी आतंकवाद को समाप्त करने के लिए जो भी कदम उठाना पड़ा उठाएंगे. दुश्मनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी.

उल्लेखनीय है कि कुद्स फोर्स के चीफ मेजर जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई है. अमेरिकी कांग्रेस ने इस युद्ध को रोकने के लिए सीनेट के निचले सदन में प्रस्ताव पारित कर दिया है. ट्रंप के अधिकार सीमित करने के लिए 'वॉर पावर्स' प्रस्ताव पास किया गया है. निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में मतदान के दौरान प्रस्ताव के समर्थन में 194 वोट पड़े. अब इस प्रस्ताव को सीनेट के ऊपरी सदन में पेश किया जाएगा.

इसके बाद ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट करते हुए ईरान को एक बार फिर से खुली धमकी दे डाली. यदि अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी सदन में भी यह प्रस्ताव पास हो गया, तो इसे लागू करने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दस्तखत की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. हालांकि, रिपब्लिकन सांसदों की मेजॉरिटी वाले सीनेट में इस प्रस्ताव का पास होना बेहद कठिन लग रहा है.

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इस्लामाबाद: आर्थिक किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान को देश में जारी माल ढोने वाले ट्रांस्पोर्टरों की हड़ताल से बड़ा झटका लग रहा है. देश के निर्यात पर इससे बेहद बुरा असर पड़ रहा है और कारोबारियों का अनुमान है कि इससे प्रति दिन लगभग दस अरब (पाकिस्तानी) रुपये का नुकसान हो सकता है.

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान तहरीके इंसाफ की सरकार की एक्पोर्ट को बढ़ाने की कोशिशों को देश में बड़ा झटका लगा है क्योंकि ट्रांस्पोर्टरों की हड़ताल की वजह से माल की ढुलाई कारखानों से बंदरगाहों तक नहीं हो पा रही है. पाकिस्तान होजरी मैन्युफैक्चर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने बुधवार को एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हड़ताल की वजह से माल ढोने वाले वाहन व कंटेनर नहीं मिल पा रहे हैं. इसके कारण होजरी जैसे निर्यातोन्मुख उद्योग को विशेष रूप से काफी नुकसान हो रहा है.

बयान में कहा गया है कि ऐसा लग रहा है कि सरकार कहीं है ही नहीं और निर्यातकों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा हैं. बयान में सरकार से तत्काल इस तरफ ध्यान देने की अपील की गई है. बयान में कहा गया है कि निर्यात योग्य वस्तुएं बनकर तैयार हैं, किन्तु इन्हें बंदरगाहों तक भेजने के लिए वाहन व कंटेनर मौजूद नहीं हैं. यह सामान खराब भी हो सकते हैं, जिससे काफी ज्यादा नुकसान होगा.

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वाशिंगटन: US में अब भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों का सिक्का चलने लगा है. गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों में तो भारतीय मूल के लोग कार्यरत हैं ही. हाल ही में सीनेटर के पदों में भी भारतीयों के वर्चस्व के बाद अब एक और अच्छी खबर सामने आई है. अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की सामिया नसीम को शिकागो के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, जल्द ही इस पद को संभालेंगी. 

अमेरिका के अटॉर्नी जनरल विलियम बर ने सामिया नसीम को शिकागो का न्यायाधीश नियुक्त किया था. हाल ही में सामिया ने शिकागो के न्याय विभाग के मुख्य भवन में एक मुख्य समारोह में न्यायमूर्ति की शपथ ग्रहण की है. इससे पहले सामिया कई बड़े पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं . सामिया नसीम के परिवार ने बताया की वे बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में बहुत अच्छी थी. उनके अब्बू नसीम खालिद जहां पेशे से वकील हैं वहीं अम्मी होमेरा नसीम इंजीनियर हैं. उनका परिवार अमेरिका जाने से पहले यूपी के गोरखपुर के प्रेस रोड में रहा करते थे. 

हालांकि वर्ष 1978 में वो अपनी स्नातक की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए और वहीं बस गए. सामिया नसीम का जन्म भी वहीं हुआ है. आपको बता दें कि सामिया नसीम ने वर्ष 2001 में वाशिंगटन के सिमंस कॉलेज से कला के क्षेत्र में स्नातक की डिग्री ली थी. UK के ऑक्सफ़ोर्ड से वर्ष 2002 में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट लॉ एंड रिफ्यूजी लॉ की शिक्षा लेने के बाद 2004 में जुरिस डॉक्टर की पढाई वाशिंगटन यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल से पूरी की. 

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न्यू यॉर्क: संयुक्‍त राष्‍ट्र (UN) में भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पाकिस्‍तान को अफवाह फ़ैलाने के लिए आड़े हाथों लिया. संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मीटिंग में उन्‍होंने पाकिस्‍तान से दो टूक शब्‍दों में कहा कि आप यहां जो प्रोपैगेंडा फैला रहे हैं, उसको सुनने वाला यहां कोई नहीं है. उन्‍होंने कहा कि यहां एक प्रतिनिधिमंडल ने एक बार फिर झूठा और गलत प्रोपैंगेडा फैलाने का प्रयास किया.

उन्होंने कहा कि हम इसे पूरी तरह से खारिज करते हैं. मेरा पाकिस्‍तान को बहुत सीधा सा जवाब है कि पड़ोसी को अपनी गड़बडि़यों का इलाज स्वयं ही करना चाहिए. आपकी बात यहां कोई सुनने वाला नहीं है. इसके साथ ही सैयद अकबरुद्दीन ने UNSC में सुधार की जरुरत पर भी जोर दिया. उन्‍होंने कहा कि एक ऐसे परिषद की आवश्यकता है जिसमें मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यथार्थ की झलक हो.

उन्‍होंने कहा कि यह पर्याप्‍त तौर पर देखने को मिल रहा है कि परिषद पहचान और वैधानिकता के संकट से जूझ रही है. इसके साथ ही उपयोगिता और प्रदर्शन को लेकर भी संघर्षरत है. आतंकी नेटवर्क का वैश्‍वीकरण, नई टेक्‍नॉलाजी का दुरूपयोग और इनको रोकने में विफलता  परिषद की खामियों को दर्शाता है.

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न्यू यॉर्क: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार रात को इराक के अमेरिकी सैन्‍य बेस के पास फिर रॉकेट से हमला किया गया. इराक के उत्‍तरी सलाहुद्दीन प्रांत के दुजैल जिले के फादलान क्षेत्र में ये रॉकेट गिरा. ये एरिया बलाड एयर बेस के पास हैं जहां अमेरिकी सेनाओं की उपस्थिति है. सूत्रों के अनुसार, ये रॉकेट कहां से आकर गिरा, इस बारे में अभी जानकारी नहीं है. किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं मिली है. दुजैल, उत्‍तरी बगदाद से 50 किमी दूर है. बलाड बेस, उत्‍तरी बगदाद से 80 किमी दूर है.

इस बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ट्वीट करते हुए कहा है कि हम अमेरिका के दुश्‍मनों को कभी भी माफ नहीं करेंगे. अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए हम नहीं हिचकेंगे. कट्टरपंथी इस्‍लामिक आतंकवाद को हराने के लिए अथक काम करते रहेंगे. दरअसल ईरान के जनरल कमांडर कासिम सुलेमानी (Qasem Soleimani) के अमेरिकी हवाई हमले में मारे जाने के बाद अमेरिका (US) और ईरान के रिश्‍ते बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों मुल्‍कों के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. 

अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से ईरान से युद्ध छेड़ने की संभावना काफी ज्यादा बनी हुई है. ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस संभावित कार्रवाई से रोकने के लिए अमेरिकी संसद ने एक प्रस्ताव पास कर दिया है.

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एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदा भारत और रूस के बीच होने वाला है. इस रक्षा सौदे को लेकर अमेरिका ने कहा कि वह कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे जिससे भारत प्रभावित हो. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नजदीकी एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन नहीं चाहता है कि वह कोई ऐसा निर्णय ले जिससे उसके बड़े रक्षा सहयोगी भारत की रक्षा क्षमताओं में गिरावट आए.दरअसल अधिकारी काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए) का हवाला दे रहे थे जिसके तहत रूस से महत्वपूर्ण रक्षा खरीदारी प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर संबंधित देश पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं.

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अपने बयान में अमेरिका ने इससे पहले कहा था कि वह भारत समेत कई देशों को सीएएटीएसए के तहत संभावित प्रतिबंधात्मक गतिविधियों से बचने और उसकी पहचान करने में मदद कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कई वार्ताओं के बाद भारत और रूस ने अक्टूबर, 2018 में पांच अरब डॉलर के एस-400 वायु रक्षा प्रणाली सौदे पर हस्ताक्षर किया था.

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इसके अलावा एक अन्य बयान में एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की रूस से खरीदारी के निहितार्थ को लेकर पूछे गए सवाल पर अधिकारी ने कहा कि मैं जानता हूं कि भारत ने वाजिब चिंताएं जाहिर की हैं... वह इसे पूरी तरह से बंद नहीं करना चाहते हैं...और वह हमारे प्रमुख साझेदार हैं और हम नहीं चाहते हैं कि उनके साथ ऐसा हो. हम उनकी रक्षा क्षमताओं को कम नहीं करना चाहते हैं. अमेरिका ने कहा कि इस तरह की बड़ी खरीददारी सीएएटीएसए प्रतिबंधों के दायरे में आती है और इसके तहत ही तुर्की के खिलाफ कदम उठाया गया था. एस-400 रूस की सबसे आधुनिक लंबी दूरी वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली है. सबसे पहले चीन ने 2014 में इस प्रणाली की खरीददारी की थी.

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